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वक्फ संशोधन विधेयक: विवादों के बीच वक्फ विधेयक राज्यसभा में पारित, लेगा कानून का रूप

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अंततः राज्यसभा में कई घंटों की बहस के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया। गुरुवार को पूरे दिन एनडीए और इंडिया ब्लॉक सांसदों के बीच गरमागरम बहस चलती रही। राज्य सभा में विधेयक के विरोध में 95 वोट पड़े तथा पक्ष में 128 वोट पड़े। इससे पहले बुधवार को लोकसभा में वक्फ विधेयक पारित हो गया।

 

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा

दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। विपक्ष मोदी सरकार पर आरोप लगा रहा था कि इस विधेयक के जरिए सरकार वक्फ संपत्तियों को जब्त करना चाहती है। वहीं, भाजपा का आरोप है कि विपक्ष अपने राजनीतिक लाभ के लिए मुसलमानों को गुमराह कर रहा है।

चर्चा 14 घंटे से अधिक समय तक चली।

 

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को दोपहर एक बजे राज्यसभा में वक्फ विधेयक विचार एवं पारित करने के लिए पेश किया। विधेयक पर 14 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई। बहस के बाद विपक्षी सांसदों के संशोधनों पर बारी-बारी से मतदान किया गया। विधेयक पर मतदान स्वचालित वोट रिकॉर्डिंग प्रणाली के माध्यम से देर रात को आयोजित किया गया। जिसके बाद विधेयक बहुमत से पारित हो गया। बहस का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक किसी भी मुसलमान को नुकसान नहीं पहुंचाता है।

लोकसभा में इसके विरोध में 232 वोट पड़े।

गौरतलब है कि सरकार ने सबसे पहले वक्फ संशोधन विधेयक 8 अगस्त 2024 को संसद में पेश कर अपने सहयोगियों को राजी कर लिया था। इसके बाद इसे जेपीसी के पास भेज दिया गया था। संसदीय समिति ने वक्फ विधेयक में नए बदलावों पर अपनी रिपोर्ट 29 जनवरी को मंजूर कर ली। इस रिपोर्ट के पक्ष में 15 और विपक्ष में 14 वोट पड़े। इसके बाद जब यह विधेयक लोकसभा में आया तो 520 सांसदों ने मतदान में भाग लिया। इनमें से 288 लोगों ने पक्ष में और 232 लोगों ने विपक्ष में मतदान किया।

बीजेडी ने आखिरी समय में लिया यू-टर्न

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने आखिरी समय में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर अपना रुख बदल दिया। बीजद ने पहले इस विधेयक का कड़ा विरोध किया था। इस विधेयक को अल्पसंख्यकों के हितों के विरुद्ध बताया गया, लेकिन बाद में सांसदों को विधेयक पर मतदान करने का स्वतंत्र निर्णय लेने की अनुमति दे दी गई। बीजद ने स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी इस विधेयक पर कोई व्हिप जारी नहीं करेगी और राज्यसभा में उसके सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान कर सकेंगे।

राज्यसभा में अतिरिक्त सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ

राज्यसभा में फिलहाल 236 सांसद हैं, जिसके चलते बहुमत के लिए 119 सांसदों का समर्थन जरूरी था। राज्यसभा में भाजपा के 98 सांसद हैं। गठबंधन के लिहाज से एनडीए के सदस्यों की संख्या करीब 118 थी। अगर हम उन छह मनोनीत सदस्यों को जोड़ लें जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में वोट देते हैं, तो संख्या के खेल में एनडीए 124 तक पहुंच जाता। कांग्रेस (27) सहित भारत ब्लॉक पार्टियों के राज्यसभा में 88 सदस्य थे।

भाजपा की रणनीति के चलते राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 128 वोट पड़े जबकि इसके विरोध में 95 सदस्यों ने मतदान किया। उल्लेखनीय है कि मतदान के दौरान भाजपा के तीन सांसद अनुपस्थित थे।

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