विंध्याचल/बिलासपुर, 5 अप्रैल . चैत्र नवरात्रि का आज आठवां दिन है, जिसे महाष्टमी के रूप में मनाया जा रहा है. इस पावन अवसर पर देशभर के मंदिरों में मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. विंध्याचल से लेकर अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर तक, भक्त मां के दर्शन और कन्या पूजन के साथ अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए मंदिरों में पहुंच रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के विंध्याचल पर्वत पर स्थित मां अष्टभुजा का मंदिर आज भक्तों से खिला हुआ है. मान्यता है कि द्वापर युग में जब पापी कंस का अत्याचार बढ़ गया था, तब मां महामाया ने नंद के घर भगवान श्रीकृष्ण की बहन के रूप में जन्म लिया. कंस ने जब नवजात बालिका को पत्थर पर पटककर मारने की कोशिश की, तो वह उसके हाथों से छूटकर आकाश में प्रकट हुईं और अष्टभुजा रूप में विंध्याचल पर्वत पर विराजमान हो गईं. मां ने कंस को चेतावनी दी, “हे दुष्ट! तुझे मारने वाला तो पैदा हो चुका है.” आज भी मां के बाएं पैर पर कंस की
पंडित अजय दुबे बताते हैं, “मां अष्टभुजा ज्ञान की देवी हैं. इनके दर्शन से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मार्कण्डेय पुराण में लिखा है कि मां ने नंद के घर जन्म लिया और कंस का विनाश करने के लिए अवतार लिया. नवरात्रि की अष्टमी पर यहां त्रिकोण मार्ग पर मां सरस्वती के रूप में मां अष्टभुजा के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं. भक्त पांडेय कहते हैं, “मां के दरबार में आने से मन को शांति मिलती है और हर बार यहां आने की इच्छा होती है.”
रामनगरी अयोध्या में भी नवरात्रि की धूम है. आज अष्टमी के मौके पर पर्यटन विभाग ने रामनवमी की तैयारी में एक हेरिटेज वॉक का आयोजन किया. इस यात्रा में भगवान शंकर और माता पार्वती के रूप में सजे कलाकार दशरथ महल से हनुमानगढ़ी, कनक भवन, राम जन्मभूमि और स्वर्ग द्वार तक भ्रमण कर रहे हैं. मुनि नारद के रूप में एक गाइड मठ-मंदिरों और स्थानों का महत्व बता रहे हैं. साधु-संत, गुरुकुल के विद्यार्थी और स्थानीय लोग इस यात्रा में शामिल हुए. माता पार्वती को महादेव अयोध्या और भगवान राम की महिमा सुना रहे हैं, जिससे यहां का माहौल भक्तिमय हो गया है.
वाराणसी के कैंटोनमेंट क्षेत्र में स्थित प्राचीन भीष्म चण्डी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं. काशी खंड में वर्णित इस मंदिर में मां के दर्शन को सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला माना जाता है. भक्त यहां हवन और कन्या पूजन के साथ मां की कृपा पाने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.
प्रयागराज के मीरापुर स्थित शक्तिपीठ मां ललिता देवी मंदिर में भी अष्टमी की रौनक है. यहां कन्या पूजन का आयोजन भी किया गया है. मान्यता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन और हवन से मां की विशेष कृपा मिलती है. यहां आए भक्तों ने से बातचीत में कहा कि छोटी कन्याएं मां दुर्गा का स्वरूप होती हैं, इसलिए उनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. मंदिर में सुबह से ही दर्शन और पूजन का सिलसिला जारी है.
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में विश्व प्रसिद्ध शक्ति पीठ श्री नैना देवी मंदिर में अष्टमी पूजन पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ हो रहा है. भारी संख्या में श्रद्धालु माता महागौरी के दर्शन के लिए पहुंचे हैं. यहां सुबह 3 बजे से मंदिर के कपाट खोल दिए गए थे, लेकिन भक्तों की भीड़ इतनी थी कि लंबी कतारें लग गईं. श्रद्धालुओं ने मां को झंडे चढ़ाए और कड़ाह प्रसाद का भोग लगाया. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों से आए भक्तों ने पूजा-अर्चना और हवन कर अपनी मनोकामनाएं मां के चरणों में रखीं. कहा जाता है कि अष्टमी मां का सबसे प्रिय दिन है, और इस दिन उनकी कृपा से भक्तों के सारे कष्ट दूर होते हैं.
श्री नैना देवी मंदिर में अष्टमी के दिन मां को लाल चुनर उढ़ाई जाती है और भक्त सुंदर पुष्पों से मां का श्रृंगार करते हैं. नारियल, अरुण के फूल और छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है. हलवा-पूरी और कड़ाह प्रसाद का भोग लगाने की परंपरा है. इसके बाद कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें 2 से 10 साल की कन्याओं को मां का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. देवी भागवत के अनुसार, अष्टमी पर कन्या पूजन से सर्वत्र विजय मिलती है और जीवन के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं.
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एसएचके/केआर
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