Russian gas supply to Europe : यूक्रेन और रूस के बीच अब नया ‘युद्ध’ शुरू हो गया है। दरअसल, यूक्रेन ने यूरोप को सप्लाई होने वाले रूसी गैस की आपूर्ति रोक दी है। यूक्रेन के इस फैसले से रूस को आर्थिक नुकसान होना तय है।
गैस सप्लाई रोकने वाले अपने फैसले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है उनका देश रूस को हमारे खून से अब अरबों की कमाई करने की अनुमति नहीं देगा। रूस की कंपनी गैजप्रोम ने गैस का निर्यात बंद होने की पुष्टि भी कर दी है। गैस आपूर्ति रोके जाने वाले फैसले के बाद यूरोप कई देश यूक्रेन से नाराज हो गए हैं। स्लोवाकिया ने यूक्रेन को अपनी बिजली रोकने की धमकी दी है।
33 साल से यूरोप को गैस की आपूर्ति कर रहा था रूस
ऐसा नहीं है कि जेलेंस्की ने यह कदम अचानक से उठाया है। उन्होंने करीब एक साल पहले यूरोपीय देशों को अपने इस फैसले के बारे में बता दिया था कि इस सर्दी से पहले वह इस रास्ते को बंद कर देंगे और यूरोपीय देश अपने लिए गैस का बंदोबस्त पहले से कर लें। यूरोप के कई देश पहले से ही रूसी गैस सीमित मात्रा में लेना शुरू कर चुके थे लेकिन अब आपूर्ति बंद हो जाने के बाद अब उन्हें नया विकल्प तलाशना होगा। रूस 1991 यानी बीते 33 साल से यूरोप के देशों को गैस की आपूर्ति करता आ रहा था। हंगरी, तुर्की और सर्बिया जैसे कई ऐसे देश भी हैं जो काफी हद तक रूसी गैस पर अभी भी निर्भर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस इन देशों को टर्कस्ट्रीम पाइप लाइन के जरिए गैस भेज सकता है।
स्लोवाकिया ने किया विरोध
यूक्रेन के इस फैसले के खिलाफ विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। जेलेंस्की के इस कदम का सबसे कड़ा विरोध स्लोवाकिया ने किया है। दरअसल, स्लोवाकिया होते हुए ही ऑस्ट्रिया, हंगरी और इटली तक रूसी गैस पहुंचती है। अपने इस रास्ते के लिए स्लोवाकियो को ट्रांजिट शुल्क के रूप में अच्छी रकम मिलती है जो कि अब बंद हो जाएगी। जेलेंस्की के इस फैसले से स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको काफी नाराज हैं। उन्होंने यूक्रेन को बिजली की आपूर्ति बंद करने की धमकी भी दी है। एक अन्य देश मोल्दोवा, जो कि यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं है, वह यूक्रेन के साथ ट्रांजिट समझौते खत्म होने से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
रूस ने खोया अपना एक अहम बाजार
यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन पाबंदियों की वजह से रूस को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। अब जेलेंस्की का यह फैसला रूस को एक बड़े आर्थिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। यूरोपीय देशों को गैस आपूर्ति से रूस को हर साल करीब 5.2 अरब डॉलर की कमाई होती है। सप्लाई मार्ग बंद होने से रूस ने अब अपना एक अहम बाजार खो दिया है। गैस आपूर्ति रोके जाने का जेलेंस्की का यह फैसला यूरोप के लिए रणनीतिक और सांकेतिक असर बहुत बड़ा है। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के इस फैसले से हैरान नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान यूरोपीय देशों को होगा।
चीन को गैस बेचेगा रूस
तो सवाल यह है कि इस सर्दी में अगर रूसी गैस यूरोप के देशों तक नहीं पहुंचा तो क्या होगा तो इसका भी जवाब है। यूरोपीय देशों ने इसका विकल्प ढूंढ लिया है। यूरोपीय संघ के देश कतर और अमेरिका से लिक्विफाइड नैचुरल गैस यानी एलएनजी लेंगे। नॉर्वे भी पाइप लाइन के जरिए गैस की आपूर्ति करेगा तो वहीं, अपने बचे हुए गैस को रूस, चीन को बेच रहा है। गैस पाइप लाइन समझौता खत्म होने से यूक्रेन को भी आर्थिक नुकसान होगा। क्योंकि ट्रांजिट शुल्क के रूप में वह रूस से हर साल 800 मिलियन डॉलर की कमाई कर रहा था। यही नहीं, गैस आपूर्ति के किरदार बदलने से लिक्विफाइड नेचुरल गैसे के दाम में उछाल भी आ सकता है। जाहिर है कि जेलेंस्की के इस फैसले से यूरोपीय संघ के अमीर देश तो ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे लेकिन मोल्डोवा जैसे ऐसे कई देश हैं जो यूरोपीय यूनियन का हिस्सा नहीं हैं लेकिन रूसी गैस पर निर्भर हैं, उन्हें ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। रूसी गैस की आपूर्ति ठप होने से यूरोप में नए सिरे से तनाव देखने को मिल सकता है।
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