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राजस्थान में अगले दो हफ्तों तक सक्रिय रहेगा मानसून, फुटेज में जानें कई जिलों में भारी बरसात का अलर्ट

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मौसम विभाग जयपुर केंद्र ने अनुमान जताया है कि आने वाले पखवाड़े तक राजस्थान में मानसून सक्रिय बना रहेगा। विभाग ने शुक्रवार को राज्य के 11 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। साथ ही 10 सितंबर तक प्रदेश के कई हिस्सों में औसत से अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसका सीधा असर कृषि कार्यों और ग्रामीण इलाकों की जलापूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाएँ लगातार उत्तरी-पश्चिमी भारत की ओर बढ़ रही हैं। यही कारण है कि मानसून की गतिविधियां अभी थमने की बजाय और तेज़ होने की स्थिति में हैं। आमतौर पर सितंबर के पहले सप्ताह तक बरसात का असर घटने लगता है, लेकिन इस बार परिस्थितियाँ कुछ अलग हैं।

गुरुवार को प्रदेश में कई जगह झमाझम बारिश दर्ज की गई। बांसवाड़ा में सबसे अधिक पाँच इंच तक वर्षा हुई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। शहर की निचली बस्तियों में जलभराव हो गया और यातायात भी बाधित रहा। इसी तरह जयपुर में भी पूरे दिन रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहा। लगातार फुहारों और कभी तेज़ बारिश ने लोगों को राहत के साथ-साथ परेशान भी किया। जयपुर में बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान सामान्य से 3 डिग्री कम रहा, जबकि न्यूनतम तापमान भी गिरकर 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। मौसम में आई इस ठंडक ने लोगों को उमस भरे मौसम से राहत दी।

इधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बरसात खरीफ की फसलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। खासतौर पर सोयाबीन, मक्का और मूंगफली जैसी फसलों को इस समय पर्याप्त पानी की ज़रूरत है। यदि अनुमानित बारिश समय पर होती रही तो किसानों को इस सीज़न में अच्छी पैदावार मिलने की संभावना है।

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जिन जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है, वहाँ अगले 24 घंटे में भारी वर्षा के साथ तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है। विभाग ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

राजस्थान में इस बार मानसून ने जून के अंत से ही सक्रिय रुख दिखाया था। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने से जलाशय और बांध लबालब हो गए। अब सितंबर के पहले पखवाड़े में भी अगर बारिश का यही क्रम जारी रहा तो प्रदेश के जल संसाधन लंबे समय तक भरे रहेंगे।

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